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A Constituent unit of Veer Kunwar Singh University
Affiliated By : Veer Kunwar Singh University
For : Co Education
Ramgarh, Kaimur : 821110
college,ramgarh,kaimur
Amenities: First Aid , Games and Sports , Sannitation
ग्राम्य संस्कृति, सभ्यता एवं ज्ञान के प्रचार प्रसार हेतु 20.06.1971 को इस क्षेत्र के जन प्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, चिंतकों एवं बुद्विजीवियों ने विद्या एवं कला की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती के पावन मंदिर के रुप में ग्राम भारती महाविद्यालय रामगढ की स्थापना की । उत्तर प्रदेश की सीमा से सटा सुदूर यह क्षेत्र देहातों में पडता है जहां उच्च शिक्षा प्राप्त करने की कोई व्यवस्था नही थी । समृद्व घरों के लडके तो आरा, सासाराम, वाराणसी एवं बक्सर में शिक्षा प्राप्त कर लेते थे, किन्तु निर्धन एवं मेधावी छात्र मन मसोस कर उच्च शिक्षा से वंचित रह जाते थे । यह महाविद्यालय इस क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुरुप स्थापित किया गया और इस क्षेत्र के निर्धन छात्रों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने की जागृति हुई । ग्रामीण परिवेश में अवस्थित यह महाविद्यालय पौराणिक गुरुकुलों एवं शान्ति निकेतन की याद ताजा कर देता है जिसमें दूर दराज के गांवों से विभिन्न जाति एवं धर्मो के निर्धन छात्र भी उच्च शिक्षा प्राप्त करने में सफल ही रहे हैं ।
यह महाविद्यालय यहां के अमर समाजवादी नेता स्व० सच्चितानन्द सिंह सिंचाई मंत्री बिहार सरकार, विद्यासागर सिंह, पूर्व प्रधानाचार्य, उच्च विद्यालय रामगढ एवं इस क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्त्ताओं के प्रयास से स्थानीय लोगों ने महाविद्यालय की भूमि की समस्या का समाधान भूमिदान करके कर दिया । आज महाविद्यालय के पास मोहनियां बक्सर रोड पर लगभग 14 एकड जमीन है जिसमें यह महाविद्यालय अपनी भव्यता एवं समृद्वि के साथ सीना ताने खडा है ।
20.07.1971 को स्थापित इस महाविद्यालय को 1973 में विश्वविद्यालय एवं बिहार सरकार से संबद्वता प्राप्त हुई तथा 7 नबम्बर को राज्य सरकार द्वारा इसके अंगीभूतीकरण की घोषणा की गई । जिसके तहत 01.12.1986 को यह महाविद्यालय मगध विश्वविद्यालय की अंगीभूत इकाई बन गया ।
इस महाविद्यालय में कला, विज्ञान एवं वाणिज्य संकायों की शिक्षा इन्टर से लेकर स्नातक प्रतिष्ठा तक दी जाती है । अभी हाल ही में बी० बी० ए०, बी० सी० ए० एवं बायोटेक्नोलौजी में अध्ययन - अध्यापन प्रारम्भ हुआ है, जो इस महाविद्यालय के लिए गर्व की बात है ।
आरम्भ में यह महाविद्यालय पेड की छाया में या खुले आसमान के नीचे ही चलता था, किन्तु धीरे-धीरे जन सहयोग एवं जनप्रतिनिधियों के सहयोग से भवन निर्माण का कार्य आरम्भ हुआ । विशेष कर क्षेत्रीय़ सांसद श्री जगदानन्द जी पूर्व मंत्री बिहार सरकार के प्रयास से चहारदीवारी, भवन, उपस्कर एवं पुस्तकालय की समस्याओं का बहुत हद तक समाधान हो सका है । वर्तमान में यह महाविद्यालय उन्न्ति की डगर पर आगे बढता हुआ उन्न्तशील की श्रेणी में आने को आतुर है ।