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Affiliated By : Deen Dayal Upadhyay Gorakhpur University
For : Co Education
ग्रामीण क्षेत्रो में अपार प्रतिभा भंडार होता है परन्तु संसाधनों के कारण ग्रामीण क्षेत्र के प्रतिभा संपन्न छात्र /छात्रायेें सुदूर स्थित विश्वविद्यालय /महाविद्यालयों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के अवसर से वंचित हो जातें हैं, जिसके परिणानाम स्वरुप उनमें छिपी प्रतिभाएं कुंठित हो जाती है तथा प्रतिभा को सही दिशा न प्राप्त होने के कारण छात्र/छात्राएं समाज की मुख्या धारा से कटकर गलत मार्गों पर जाने के लिए विवश हो जातें हैं.
इन्ही समस्याओं को देखते हुए पूर्वांचल के एक ग्रामीण क्षेत्र सहजनवा के भगौरा ग्राम में सं 2008 में "बाबू लाल जी सिंह महाविद्यालय" की स्थापना की गई। महाविद्यालय का नाम "बाबू लालजी सिंह" रखने का स्पष्ट उद्देशय था की चूँकि वे जीवनपर्यन्त शिक्षा के विकास एवं प्रचार के लिए प्रयासरत रहे तथा क्षेत्र के गरीब प्रतिभाशाली छात्र / छात्राओं को शिक्षा ग्रहण करने में आर्थिक एवं सामाजिक सहयोग करते रहे. उनका कथन था कि "कोई भी छात्र संसाधनों की कमी एवं धनाभाव के कारण शिक्षा से वंचित न होने पाए",इसके लिए वे छात्र/छात्राओं के सहयोग में अग्रणी भूमिका निभाते थे। अपने जीवन काल में उन्होंने एक हज़ार से अधिक प्रतिभाशाली छात्र/छात्राओं को सरकारी एवं गैर सरकारी सेवाओं में लगवाकर उनकी मदद की। आज से लगभग 80 वर्ष पूर्व सन 1934 में स्थापित "मुरारी इण्टर कॉलेज, सहजनवा " का लगभग 40 वर्षो तक सफलतापूर्वक संचालन प्रबंधक के रूप में किया तथा विद्यालय को सफलता के शिखर तक पहुंचाया। दूरदृष्टि, सकारात्मक सोच, मानवता के प्रति चिंतन एवं समाज के प्रति कुछ अच्छा करने के विचार ने ही उनको "सहजनवा क्षेत्र की एक पहचान" बना दिया। शिक्षा के क्षेत्रमें अविस्मरणीय योगदान एवं उनके उद्देश्यों को जीवित रखने हेतु मैंने सन् 2008 में अपने श्रद्देय बाबा जी के नाम पर महाविद्यालय की स्थापना की. स्थापना वर्ष में महाविद्यालय में कला संकाय के अंतर्गत बी.ए में सात विषय संचालित हुए। वर्तमान सत्र में महाविद्यालय में हिंदी , गृह विज्ञानं,समाजशास्त्र, शिक्षाशास्त्र, राजनीतिशास्त्र, संस्कृत, अंग्रेजी, इतिहास, भूगोल, ललित कला एवं शारीरिक शिक्षा कुल 11 विषयों की मान्यता प्राप्त है. विगत 11 वर्षों में महाविद्यालय के छात्र/छात्राओं का परीक्षाफल प्रतिशत उत्तम रहा तथा सभी कक्षाओं में अधिकतम छात्र प्रथम एवं द्वितीय श्रेणी में रहे.
महाविद्यालय की स्थापना से अब तक 11 वर्षों में इसे सफलता पूर्व संचालित करने में क्षेत्र के वुद्धिजीवियों, विशिष्ठ नागरिकों तथा क्षेत्रीय जनता का अपार सहयोग रहा है जिसके लिए मैं ह्रदय से उनका आभार व्यक्त करता हूँ तथा भविष्य में महाविद्यालय को शिक्षा के क्षेत्र में शिखर तक ले जाने में सहयोग की अपेक्षा करता हूँ.
प्रबंधक
मानस सिंह